श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र मन्दिर आन्दोलन से जुड़े साधु-सन्त और नेता

0
153

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र मन्दिर आन्दोलन से जुड़े साधु-सन्त और नेता

महंत रघुबर दास : अंग्रेजों के दौर में अयोध्या में पहली बार सन् 1853 में निर्मोही अखाड़े ने दावा किया कि मन्दिर को तोडक़र मस्जिद बनवायी गयी। विवाद हुआ, तो प्रशासन ने विवादित स्थल पर मुस्लिमों को अन्दर इबादत और हिन्दुओं को बाहर पूजा की अनुमति दे दी; लेकिन मामला शान्त नहीं हुआ। सन् 1885 में महंत रघुबर दास ने मामले को लेकर फैज़ाबाद अदालत में बाबरी मस्जिद के पास राम मन्दिर के निर्माण की इजाज़त के लिए अपील दायर की और राम चबूतरे को जन्मस्थान बताया और वहाँ एक मण्डप बनाने की माँग की। यह अयोध्या विवाद से जुड़ा हुआ पहला मुकदमा था। उनकी अपील खारिज हो गयी; लेकिन मार्च, 1886 में वह ज़िला जज फैज़ाबाद कर्नल एफईए कैमियर की अदालत में पहुँचे, जिन्होंने फैसले में कहा कि मस्जिद हिन्दुओं की जगह पर बनी है। हालाँकि यह भी कहा कि अब देर हो चुकी है और इतने साल पुरानी गलती को अब सुधारना मुमकिन नहीं है, इसीलिए यथास्थिति रखी जाए।

बैरागी अभिराम दास : बिहार के दरभंगा में पैदा हुए बैरागी अभिराम दास रामानंदी सम्प्रदाय के संन्यासी थे और उनका नाम 22-23 दिसंबर, 1949 की दरम्यानी रात राम जन्म स्थान पर विवादित ढाँचे के भीतर भगवान राम की प्रतिमा के प्रकटीकरण के सम्बन्ध में सामने आया था। इस सम्बन्ध में तत्कालीन प्रशासन द्वारा दायर प्राथमिकी में उन्हें मुख्य अभियुक्त बनाया गया था। अयोध्या में उन्हें योद्धा साधु पुकारा जाता था। हिन्दू महासभा के सदस्य रहे अभिराम दास का सन् 1981 में देहांत हुआ।

देवराहा बाबा : आध्यात्मिक संन्यासी देवराहा बाबा के जन्मस्थान और वर्ष के बारे में जानकारी हमेशा रहस्य में रही है। उत्तर प्रदेश के देवरिया में सरयू नदी के किनारे उनका निवास रहा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक को उनका शिष्य माना जाता है। जनवरी, 1984 में प्रयागराज के कुम्भ में आयोजित धर्म संसद की अध्यक्षता उन्होंने ही की थी; जिसमें विभिन्न हिन्दू सम्प्रदायों के धार्मिक एवं आध्यात्मिक नेताओं ने मिलकर 9 नवंबर, 1989 को अयोध्या में राम मन्दिर की नींव रखने का फैसला किया था।

मोरोपन्त पिंगले : नागपुर के मॉरिस कॉलेज के ग्रेजुएट और आरएसएस के प्रचारक पिंगले परदे के पीछे काम करने वाले रणनीतिकार माने जाते हैं। सभी प्रमुख यात्राओं और तमाम देशव्यापी अभियानों को आरम्भ करने में उनकी अहम भूमिका रही। शिला पूजन कार्यक्रम भी इसमें शामिल है; जिसके तहत तीन लाख से भी अधिक ईंटें अयोध्या पहुँचायी गयी थीं।

महंत अवैद्यनाथ : 1980 के दशक के मध्य में महंत अवैद्यनाथ राम मन्दिर आन्दोलन का नेतृत्व करने के लिए गठित रामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के प्रथम प्रमुख और रामजन्मभूमि न्यास समिति के अध्यक्ष थे। वह उत्तर प्रदेश के गोरक्षपीठ के महंत दिग्विजयनाथ के अनुयायी बने और सन् 1940 में संन्यासी के रूप में महंत अवैद्यनाथ का नाम धारण किया। बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में वह भी एक आरोपी बने।

स्वामी वामदेव : सन् 1984 में जयपुर में अखिल भारतीय सम्मेलन के ज़रिये तमाम हिन्दू धार्मिक और आध्यात्मिक नेताओं को एक मंच पर लाने में अहम भूमिका निभायी। तब 400 से भी अधिक हिन्दू धार्मिक नेताओं ने 15 दिन तक विचार मंथन करके आन्दोलन का रोडमैप तैयार किया था। स्वामी वामदेव ने सन् 1990 में अयोध्या में कारसेवकों का आगे बढक़र नेतृत्व किया था। मुलायम सिंह यादव सरकार के आदेश पर पुलिस द्वारा की गयी गोलीबारी में इनमें से कई की मौत हो गयी। स्वामी वामदेव 6 दिसंबर,1992 को अयोध्या में थे, जब बाबरी मस्जिद गिरायी गयी।

श्रीश चंद्र दीक्षित : उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त डीजीपी श्रीश चंद्र दीक्षित ने राम मन्दिर आन्दोलन में कार सेवकों के लिए नायक की भूमिका निभायी थी। सेवानिवृत्त होने के बाद वह विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) से जुड़ गये और केंद्रीय उपाध्यक्ष बन गये। प्रशासन से नज़रें बचाकर कारसेवकों को अयोध्या पहुँचाना हो या फिर कानून को धता बताकर कार सेवा करवाना; इन कामों में श्रीश चंद्र दीक्षित ने बड़ी भूमिका निभायी थी। सन् 1991 के लोकसभा चुनाव में श्रीश चंद्र दीक्षित काशी से जीतकर सांसद बने।

विष्णु हरि डालमिया : व्यापारी परिवार के डालमिया सन् 1992 से सन् 2005 तक विहिप के अध्यक्ष रहे। वह रामजन्मभूमि आन्दोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। सन् 1985 में श्रीराम जन्मभूमि न्यास का गठन हुआ, तो उन्हें कोषाध्यक्ष बनाया गया। बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।

दाऊ दयाल खन्ना : राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के महासचिव के रूप में खन्ना ने मन्दिर आन्दोलन का आधार तैयार करने में अहम भूमिका निभायी थी। आरम्भिक वर्षों में कांग्रेस में रहे खन्ना ने सन् 1983 में एक जनसभा में अयोध्या, मथुरा और काशी (वाराणसी) में मन्दिरों के पुनर्निर्माण का मुद्दा उठाया था। सितंबर, 1984 में बिहार के सीतामढ़ी से मन्दिर आन्दोलन के लिए पहली यात्राओं में से एक की अगुआई की।

कोठारी बन्धु : राम कुमार कोठारी और शरद कुमार कोठारी सगे भाई थे; जो अक्टूबर, 1990 में कारसेवा में भाग लेने के लिए अयोध्या आये थे। उन्होंने कारसेवकों के पहले जत्थे के सदस्यों के रूप में 30 अक्टूबर, 1990 को अयोध्या में कारसेवा की थी। दो दिन बाद, 02 नवंबर को कारसेवा के ही दौरान पुलिस द्वारा चलायी गयी गोली से उनकी मौत हो गयी। इससे देश भर में नाराज़गी के स्वर उभरे। रामजन्मभूमि आन्दोलन में उन्हें नायक और शहीद का दर्जा दिया गया।

के.के. नायर : केरल के अलप्पी के रहने वाले के.के. नायर की भी राम मन्दिर मामले में अहम भूमिका रही। नायर सन् 1949 में फैज़ाबाद के कलेक्टर बने और उसी साल विवादित स्थल पर राम की मूर्ति रखी गयी। कहते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पन्त के कहने के बावजूद नायर ने मूर्ति को हटवाने के आदेश को नहीं माना। नायर सन् 1952 में सेवानिवृत्ति लेकर जनसंघ (जो  इसके संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निधन के बाद भारतीय जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी के रूप में बदल गया) से जुड़ गये। वह अवध में हिन्दुत्व के बड़े प्रतीक बन गये और बाद में जनसंघ के टिकट पर लोकसभा पहुँचे। उनके अलावा सुरेश बघेल और गोपाल सिंह विशारद का भी आन्दोलन में बड़ा रोल रहा।

अशोक सिंघल : विश्व हिन्दू परिषद् को बड़ी पहचान दिलाने और अशोक सिंघल का राम मन्दिर आन्दोलन में बड़ा योगदान रहा। देश और विदेश में मन्दिर निर्माण के पक्ष में माहौल बनाने और आन्दोलन में उनकी बड़ी और आक्रामक भूमिका रही। सन् 1981 में विहिप से जुडऩे वाले सिंघल के नेतृत्व में ही सन् 1984 में विशाल धर्म संसद का आयोजन किया गया। इसी धर्म संसद में राम मन्दिर निर्माण को लेकर निर्णायक आन्दोलन शुरू करने का संकल्प लिया गया था। इसके अलावा सन् 1989 में अयोध्या में विवादित स्थल के पास राम मन्दिर निर्माण की आधारशिला रखने में भी सिंघल का अहम योगदान था। अपनी फायरब्रांड छवि के कारण सिंघल राम भक्तों और हिन्दुओं के बीच काफी लोकप्रिय हुए। सन् 2015 में उनका निधन हो गया।

लालकृष्ण आडवाणी : आडवाणी ने इस आन्दोलन को राजनीतिक मुद्दा बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभायी थी। भाजपा अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने सन् 1990 में राम मन्दिर निर्माण के लिए जगन्नाथ पुरी से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली, जिस पर नरेंद्र मोदी की एक तरह से सारथी की भूनिका थी। आडवाणी का लक्ष्य 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुँचना था; लेकिन 23 अक्टूबर को बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार ने उन्हें रोककर गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद 6 दिसंबर, 1992 को जिस दिन विवादित ढाँचा ढहाया गया था, उस दिन आडवाणी भी वहीं थे। भाजपा, विहिप और बजरंग दल के अन्य नेताओं के साथ वहाँ मौज़ूद आडवाणी आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे थे और मंच से भाषण दे रहे थे। देखते-ही-देखते कारसेवकों ने विवादित ढाँचा गिरा दिया। इस मामले में आडवाणी समेत मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विनय कटियार, उमा भारती, विष्णु हरि डालमिया और साध्वी ऋतंभरा पर साज़िश का मुकदमा दर्ज किया गया।

कल्याण सिंह : विवादास्पद ढाँचा विध्वंस के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह की छवि हिन्दू हृदय सम्राट की बनी। मुख्यमंत्री न रहते हुए भी उन्होंने मन्दिर आन्दोलन में लगातार अहम भूमिका निभायी। सन् 1992 में सर्वोच्च न्यायालय को विवादित ढाँचे की सुरक्षा का हलफनामा दिया। विवादित ढाँचा टूटने के बाद उनकी सरकार बर्खास्त कर दी गयी। कल्याण सिंह बाद में भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। फिर उनका भाजपा में आना-जाना लगा रहा। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उन्हें राज्यपाल बनाया गया और फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूर हैं।

मुरली मनोहर जोशी : भाजपा का प्रमुख चेहरा रहे मुरली मनोहर जोशी ने भी इस आन्दोलन में अहम भूमिका निभायी। आडवाणी की तरह विवादास्पद ढाँचा विध्वंस मामले में आरोपी बनाये गये। अब आडवाणी की तरह ही सक्रिय राजनीति से दूर हैं।

उमा भारती : राम मन्दिर आन्दोलन के दौरान साध्वी उमा भारती जनसभाओं में विहिप और भाजपा की मुख्य वक्ताओं में थीं। उन्होंने सन् 1990 से 1992 के आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभायी। विवादास्पद ढाँचा विध्वंस मामले में आरोपी उमा बाद में वाजपेयी और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बनीं। फिलहाल खुद संसदीय राजनीति से दूर हैं।

विनय कटियार : बजरंग दल की स्थापना कटियार ने ही की थी। वह राम मन्दिर आन्दोलन से बहुत सघन रूप से जुड़े रहे। उन्हें इस आन्दोलन का एक बड़ा चेहरा माना जाता है। फैज़ाबाद से वह तीन बार सांसद भी रहे हैं। कटियार भी 5 अगस्त के भूमि पूजन कार्यक्रम में नहीं पहुँचे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here